EK BOOND KEE AATMAKATHA

एक बूँद की आत्मकथा

Authors: डॉ. बीना सचान,
Publish Date/ Year : फ़रवरी २०२६ | Format: Paperback | Genre : Medical Science | Other Book Detail

जब मैंने जल संरक्षण पर लिखने की ठानी, तब एक सवाल मन में था- क्या नया लिखूँ जो लोग पहले नहीं पढ़ चुके? पर जवाब खुद पानी ने दिया- "मेरी कहानी सुनाओ, लोगों ने मुझे इस्तेमाल किया है, पर कभी मेरी सुनी नहीं।"
यही सोचकर यह किताब लिखी एक बूँद की आत्मकथा । यह किताब आँकड़ों की रिपोर्ट नहीं है, यह एक बूँद की यात्रा है, पर साथ में उसकी भावनाएँ, संघर्ष, और उसकी चीख भी सुनाई देगी। यह किताब पाठकों के मन से संवाद करती है कभी नदी बनकर, कभी बादल बनकर, कभी टपकते नल के दर्द से, तो कभी बच्चों की हथेलियों में चमकती मासूम बूँद बनकर। मैं चाहती हूँ कि यह पुस्तक सिर्फ़ पढ़ी न जाए, महसूस की जाए। यह सिर्फ़ पानी की आत्मकथा नहीं- यह हमारी सभ्यता की, हमारी संस्कृति की, और हमारी जिम्मेदारी की आत्मकथा है।
Pages

102 pages
Language

हिंदी
Publication date

फ़रवरी २०२६
ISBN-13

९७८ -९३ -६६७८ -०५३ -५




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डॉ. बीना सचान

डॉ. बीना सचान

डॉ. बीना सचान एक समर्पित चिकित्सक और संवेदनशील लेखिका हैं। वे कम्युनिटी मेडिसिन विभाग में वर्षों से स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक व्यवहार के आपसी संबंधों पर कार्य कर रही हैं। उनका कार्यक्षेत्र केवल अस्पतालों और कक्षाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गाँवों, बस्तियों और समाज के उन कोनों तक फैला है जहाँ स्वास्थ्य, स्वच्छता और जल सबसे ज़्यादा उपेक्षित हैं।
चिकित्सा विज्ञान की कठोरता और साहित्य की कोमलता—इन दोनों के बीच सेतु बनाना उनकी लेखनी की विशेषता है।
“एक बूँद की आत्मकथा” उनका एक विशिष्ट प्रयास है—
जहाँ पानी की बूँद सिर्फ H₂O नहीं,
बल्कि एक जीवित अनुभव,
एक मौन साक्षी
और मानव सभ्यता की आत्मा बनकर बोलती है।
इस पुस्तक में उनका चिकित्सकीय दृष्टिकोण आँकड़ों और तथ्यों से आगे बढ़कर करुणा, संवेदना और ज़िम्मेदारी की बात करता है। वे मानती हैं कि स्वास्थ्य नीतियाँ तभी सफल होंगी जब विज्ञान में संवेदना और समाज में सहभागिता जुड़ जाएगी।
डॉ. बीना सचान का विश्वास है—
“यदि हम पानी को समझना सीख लें,
तो जीवन को बचाना अपने-आप आ जाएगा।”