DRIGHAYU

दीर्घायु

Authors: डॉ अिवनाश शंकर,
Publish Date/ Year : ऑक्टोबर २०१९ | Format: Paperback | Genre : Geography | Other Book Detail

धरती पर जीवों का उदय पौधों और जंतुओं के रूप में हुआ है, जो जीवन के अस्तित्व के लिए एक-दूसरे पर पूरी तरह निर्भर हैं। इस संबंध में मनुष्य को प्रकृति का सबसे विकसित जीव माना गया है, जिसके जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए वनस्पतियां (पौधे) अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं
Pages

२५२ pages
Language

Marathi
Publication date

ऑक्टोबर २०१९
ISBN-13

९७८-९३-८९३३९२-१-५




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डॉ अिवनाश शंकर

डॉ अिवनाश शंकर

डॉ अविनाश शंकर महात्मा गाँधी चिकित्सा विज्ञान संसथान सेवाग्राम (वर्धा) महाराष्ट्र से चिकित्सा विज्ञानं में स्नातक, नागपुर विश्वविद्यालय से इंटरनल मेडिसिन में स्नातकोत्तर, अखिल भारतीय चिकित्सा विज्ञान संसथान से एंडोक्रिनोलॉजी एवं मेटाबोलिज्म में स्नातकोत्तर के साथ नेशनल बोर्ड ऑफ़ एग्जामिनेशन से डी. एन. बी के साथ ही कई मानक अंतर राष्ट्रिय संस्थाओं से फ़ेलोशिप की उपाधि प्राप्त की। इन सव उपलब्धिओं के वावजूद ग्रामीण सेवा की प्रतिवद्धता से ओतप्रोत होने के कारण चिकित्सा सेवा के साथ चिकित्सा के क्षेत्र में शोध के कार्य हेतु संसथान की शुरुआत कर आज करीव ३५ वर्षों से निरंतर नियमित सेवा में कार्यरत है, इस दरम्यान २०० से अधिक शोध पत्र विभिन्न राष्ट्रिय एवं अंतर राष्ट्रीय चिकित्सीय पत्रिका में प्रकाशित हो चूका है साथ ही राष्ट्रिय एवं अंतर राष्ट्रिय चिकित्सा सम्मेलन में शोध पत्र प्रस्तुत कर चुके है यथा- रॉयल कॉलेज ऑफ़ फिजिशियन एंड सर्जन, ग्लास्गो, इंटरनेशनल डायबिटिक फेडरेशन, आदि, इसके अलावे विभिन्न चिकित्सीय सम्मेलन में वैज्ञानिक सत्र की अध्यक्षता भी की है। वर्तमान में करीव १०० राष्ट्रिय एवं अंतर राष्ट्रिय चिकित्सा पत्रिका के संपादक मंडल एवं समीक्षक मंडल के सदस्य है साथ ही हँड बुक ऑफ़ पोइजनिंग, सिनोप्सिस ऑफ़ ट्रीटमेंट, सिनोप्सिस ऑफ़ डायग्नोसिस, लोंगेविटी एवं फार्माकोलॉजिकल बेसिस ऑफ़ इंडिजेनस थेराप्यूटिक्स के लेखक भी। बर्तमान में विभिन्न संस्थाएं यथा विहार समाज कल्याण संसथान रांची (झारखण्ड), पुनर्जीवन बिहार, पटना (बिहार), लुकोडेर्मा फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया, इंडिया एपिलेप्सी फोरम, इंस्टिट्यूट ऑफ़ एप्लाइड न्यूरो एंडोक्रिनोलॉजी, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ एंड रिसर्च आदि के अध्यक्ष भी है। जीवन का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में अनुसन्धान जिस कारण विभिन्न रोगों हेतु चयनित निदान आज सर्वोपरि है यथा अतिसार, सफ़ेद दाग, अपस्मार, अश्मरी, सोरिएसिस, गठियाँ, लकवा, पर्किन्सोनिस्म आदि।