Narmada–Tattvam Ved Puran aur Ashtak me Nihit Vigyan

नर्मदा-तत्त्वम् वेद, पुराण और अष्टक में निहित विज्ञान

Authors: डॉ. समीर कुमार शुक्ल, डॉ. अर्जुन शुक्ला,
Publish Date/ Year : जनवरी २०२६ | Format: Paperback | Genre : History | Other Book Detail

भारतीय संस्कृ तत में नदी के वल भौगोतलक संरचना नहीं, अतितु जीवन, चेतना और सभ्यता का आधार है । हमारी िरंिरा ने नतदयों को माता कहा, यह संबोधन भावनात्मक मात्र नहीं, बतकक प्रकृ तत के प्रतत उत्तरदातयत्व का सांस्कृ ततक तवधान है । इन्हीं नतदयों में मााँ नममदा का स्थान अत्यंत तवति???? है । तवंध्य और सतिुडा के मध्य प्रवातहत यह धारा के वल जलप्रवाह नहीं, बतकक इततहास, अध्यात्म, दिमन और ियामवरणीय संतुलन का जीवंत उदाहरण है
Pages

१३३ pages
Language

हिंदी
Publication date

जनवरी २०२६
ISBN-13

९७८-९३-६६७८-८५०-०




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डॉ. समीर कुमार शुक्ल

डॉ. समीर कुमार शुक्ल

डॉ. समीर कुमार शुक्ल मध्यप्रदेश के सुविख्यात शिक्षाविद्, गणित एवं कंप्यूटर विज्ञान के विषय विशेषज्ञ तथा अनुभवी प्रशासक हैं। 09 सितंबर 1983 से उच्च शिक्षा सेवा में व्याख्याता के रूप में अपने शैक्षणिक जीवन की शुरुआत की। वर्तमान में शासकीय मोहनलाल हरगोविंददास गृहविज्ञान एवं विज्ञान महिला महाविद्यालय जबलपुर में प्राचार्य पद पर कार्यरत हैं। शिक्षण, अनुसंधान एवं शैक्षणिक प्रशासन में चार दशकों से अधिक अनुभव के साथ आपने राज्य, संभाग एवं जिला स्तर पर गणित एवं कंप्यूटर साइंस विषय के विशेषज्ञ के रूप में महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। आप विभिन्न शासकीय, निजी एवं स्वायत्त महाविद्यालयों की निरीक्षण समितियों के समन्वयक, बोर्ड ऑफ स्टडीज के सदस्य तथा साक्षात्कार बोर्ड के विषय विशेषज्ञ रहे हैं। कई राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन आपके मार्गदर्शन में संपन्न हुए। उद्यमिता, कैरियर परामर्श, वर्चुअल शिक्षण एवं अकादमिक स्टाफ कॉलेजों में आप रिसोर्स पर्सन के रूप में भी सक्रिय रहे हैं। प्रशासनिक दक्षता को सुदृढ़ करने हेतु आपने नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी, भोपाल में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। साथ ही, जिला निर्वाचन कार्यालय में निर्वाचन कार्य के समन्वयक के रूप में प्रशासनिक दायित्व भी निभाए हैं। आपके नेतृत्व में महाविद्यालय ने गुणवत्ता संवर्धन, NAAC मानकों के अनुरूप शैक्षणिक उन्नयन, अधोसंरचना विकास एवं महिला शिक्षा सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों अर्जित की हैं। अनुशासन, पारदर्शिता, शैक्षणिक उत्कृष्टता तथा संस्थागत विकास के प्रति आपकी प्रतिबद्धता आपको एक प्रेरणास्रोत शिक्षाविद् के रूप में प्रतिष्ठित करती है।

डॉ. अर्जुन शुक्ला

डॉ. अर्जुन शुक्ला

डॉ. अर्जुन शुक्ला मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित प्राणीशास्त्री, जलीय पारिस्थितिकी एवं जैव- विविधता के शोध विशेषज्ञ तथा सक्रिय शिक्षाविद् हैं। आपने अपने शैक्षणिक जीवन की शुरुआत प्राणी विज्ञान के अध्यापन एवं अनुसंधान से की और वर्तमान में शासकीय मो. ह. गृह विज्ञान महाविद्यालय, जबलपुर में प्राणीशाख विभाग में फैकल्टी के रूप में कार्यरत हैं। डॉ. अर्जुन का प्रमुख शोध क्षेत्र नर्मदा नदी की जैव-विविधता, विशेषकर बेंधिक मैक्रोइनवर्टिब्रेट्स के माध्यम से बायोमॉनिटरिंग अध्ययन रहा है। आपके द्वारा 115 से अधिक अंतरराष्ट्रीय शोध/समीक्षा शोधपत्र, 122 शोध सार तथा 30 राष्ट्रीय विज्ञान पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित किए जा चुके हैं। साथ ही 18 पुस्तक अध्याय एवं 16 पुस्तकों का लेखन कर विज्ञान साहित्य को समृद्ध किया है, जिनमें नर्मदा नदी नहीं सभ्यता' विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। डॉ. अर्जुन के नाम 21 विश्व रिकॉर्ड हैं तथा 115 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार/सम्मान से अलंकृत किया जा चुका है। विज्ञान एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत श्री, विज्ञान रत्न, नर्मदा रत्न, पर्यावरण रत्न, एशिया टॉप 50 रिसर्चर अवार्ड, इंटरनेशनल यंग एंटोमोलॉजिस्ट अवार्ड तथा इंटरनेशनल लाइफटाइम बेस्ट रिसर्चर अवार्ड जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया है। विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विषय विशेषज्ञ एवं मुख्य अतिथि के रूप में आपकी उपस्थिति विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत रही है। डॉ. अर्जुन शुक्ल का व्यक्तित्व शिक्षा, अनुसंधान, पर्यावरण चेतना एवं सामाजिक दायित्व का सशक्त समन्चय प्रस्तुत करता है।